मेरी आवारगी

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नृत्य मनुष्य का रुदन है, कविता उसके आंसू : सचिन श्रीवास्तव
यही मुनासिब है आदमी के लिए कि वक़्त के साथ चलता रहे : श्रीश
लोकतंत्र की सड़क बहुत लम्बी है ; सरकार की कीलें कम पड़ जाएँगी !
 मन की गाठों को अवसाद न बनने दें-संवाद करें : दयाशंकर मिश्रा
100 बरस की 10 श्रेष्ठ कविताएं : मंगलेश डबराल