मेरी आवारगी

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अब लुप्त सी होती जा रही है कोहरी
कितना मुश्किल है गाँव तुझे जी पाना
शहर की सड़क का पिघलता डामर और गाँव
 कभी-कभी किसान जाग जाता है
गाँव की अमराई, बचपन और इमली का डंडा अब कहाँ है ?