मेरी आवारगी

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भोपाल मेरी जान तुम्हारी गलियों में भटकना अब भी सुकून देता है
एक अनाम राजकुमारी की दास्तां
ये ''मैंगो पीपुल'' हैं या ''पिलपिले आम'' आदमी....!!
गाँव की अमराई, बचपन और इमली का डंडा अब कहाँ है ?
शहर की प्यास बुझाती ज़रा सी बावड़ी