मेरी आवारगी

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एक पत्र सखी के नाम : हे सखी, मैं मनुष्यता की ओर बढ़ने के लिए तुम्हारा स्त्रीत्व पाना चाहता हूं।
एक पत्र भांजी के नाम : याद रखना तुम्हारी हंसी से बेहतर दुनिया में कुछ भी नहीं है
प्रेम हर जख्म का सबसे बड़ा मरहम है।
आवारा की डायरी - 3 कड़ी में पढ़िए :-रिश्ते का मैलापन इश्किया बारिश में धुलकर वो आगे बढ़ गए थे।
आवारा की डायरी 2 कड़ी में पढ़िए : जिंदगी में मोहब्बत का साइक्लोन फिर से दस्तक दे चुका था
"आवारा की डायरी" - १ कड़ी में पढ़िए : - जख्म पर तुम्हारी यादों के फाहे रख दिए हैं
गाँव की दूसरी चिट्ठी का जवाब : मैं अपनी चिता भस्म से तुम्हारी बूढ़ी काया का श्रृंगार करूंगा
गाँव की दूसरी चिठ्ठी: रंजिश ही सही दिल दुखाने के लिए आ...!!
मेरे प्यारे गाँव: शहर की सड़क के पिघलते डामर से  चिपकी चली आई तुम्हारी याद