(मुझे खुलकर हंसने के लिए दांत चाहिए, जो टूट गए हैं।) एक पत्र सखी के ना…
अबकी रक्षाबंधन पर मामा-भांजी एक साथ। प्रिय गुल्लू, मैं तुम्ह…
इस कठिन वक्त में तुम्हारा स्पर्श भी चिकित्सा है। …
आवारा की डायरी - 3 कड़ी में पढ़िए :- रिश्ते का मैलापन इश्किया बारिश में …
। फोटो साभार : गूगल बाबा " आवारा की डाय…
"आवारा की डायरी" - १ कड़ी में पढ़िए : - जख्म पर तुम्हारी यादो…
मैं अपनी चिता भस्म से तुम्हारी बूढ़ी काया का श्रृंगार करूंगा ************…
फोटो कैप्शन : गाँव की अमराई का वो पेड़ जिसमें चढ़कर कभी " इमली का डंडा खे…
(फोटो : दीपक गौतम) मेरे गांव के तालाब किनारे से ढलती शाम का एक खूबसूरत…
।।नृत्य मनुष्य का रुदन है, कविता उसके आंसू।। जो लोग कलाओं को “जीवन का उल्ल…
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